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Wednesday, January 26, 2011

Tum meri laaj rakho | Surdas | Jagjit Singh

This bhajan is written by Surdas ji. I have a recording sung by Jagjit Singh.

तुम मोरी राखो लाज हरि

तुम जानत सब अन्तर्यामी , करनी कछु ना करी
तुम मोरी राखो लाज हरि

औगुन मोसे बिसरत नाही, पल छिन घरी घरी
तुम मोरी राखो लाज हरि

दारा सुत धन मोह लिए हो, सुध बुध सब बिसरी
तुम मोरी राखो लाज हरि

 सूर पतित को बेग उबारो, अब मेरी नाव तरी (?)
तुम मेरी राखो लाज हरि

Monday, October 18, 2010

Soi rasna jo by Surdas

This bhajan was written by Surdas. It explains the purpose of the various parts of the body. I shall attempt to put some explanations...

सोई रसना जो हरी गुण गावे
(रसना = जीभ - जीभ का काम है हरी गुण गाना...)
नैनं की छवि यही चतुरता जो मुकुंद मकरंद ही ध्यावे
(नैनो का काम है की वोह हर समय हरि की छवि को देखती रहे)

निर्मल चित्त तो सोई साँचो, कृष्ण बिना जिहिं और ना भावें
स्रवनन  की जू यह अधिकाई सुनी हरि कथा सुधा रस पावे
सोई रसना जो...
(निर्मल चित्त वही है जिसको कृष्ण ही अच्छे लगे, और कान कृष्ण नाम कर अमृत (सुधा) प्राप्त करते रहे)

कर ते ईसे स्याम ही सेवे, चरनन नि चरी वृन्दावन जावे
सूरदास जे बलि बंकि जो हरि जू सो प्रीती बढ़ावे
सोई रसना जो...
(कर मतलब हाथ, का काम है की वोह श्याम की सेवा में रत रहे, और चरणों का काम की वह हमेशा वृन्दावन की ओर चलते रहे)