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Thursday, November 18, 2010

Bindu Goswami in his unique style

Binduji has this unique way of writing in a conversational style with Shri Krishna. One such dialogue, also sung by Shri Vinodji.
कन्हैय्या को एक रोज रो कर पुकारा,
कहा उनसे जैसा हूँ अब हूँ तुम्हारा

वोह बोले की किया क्या दुनिए में आकर
मैं बोला की अब भेजना मत दोबारा

वोह बोले की साधन किये तुने क्या क्या
मैं बोला किसे तुमने साधन से तारा

वो बोले परेशान हूँ तेरी बहस से
मैं बोला की कह दो तू जीता मैं हारा

वोह बोले जरिया तेरा क्या है मुझ तक
मैं बोला की दृग बिंदु का है सहारा...
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Saturday, September 25, 2010

More by Bindu Goswami Ji | Sung by Vinod Agrawalji

Found in an album from Vinodji called Shri Dham Vrindavan:

पद आप की पाद की पालक हैं
तो झुका इनमें यह माथ रहे

यदि पंकज की उपमान में है
तो विमिश्रित पंक का पाथ रहे
(अगर आपके चरणों को पंकज या कमल की उपमा दी जाती है, तो कमल तो कीचड़ में उगता है. मेरे पापों की कीचड़ से अच्छी जगह कहा मिलेगी आपके पद-कमलो को प्रकट होने के लिए )

है गुलाब प्रसून की जो उपमा
अभी कंटक का कुछ हाथ रहे
(आपके चरणों को गुलाब की भी उपमा दी जाती है. गुलाब के नीचे कांटे होते है. हम उन कंटक जैसे है, 'कविता सविता नहीं आती, मन में जो आया बका करते है' ...)

नख मंडल है शशि मंडल सा
तो कलंक का 'बिंदु' भी साथ रहे
(आपके नाखूनों को चन्द्रमा की उपमा दे जाती है. चन्द्रमा में भी दाग है. हम वोह कलंक के दाग है... हमारा काम भी बन जाएगा और उपमा भी सार्थक हो जाएगी. इसी लाइन से पता चलता है की यह बिंदु गोस्वामी की रचना है )

मेरे बाँके बिहारी मो पे कृपा करो...

Wednesday, August 25, 2010

Jo Karunakar tumhara Braj mein phir avtaar ho jaaye | Bindu ji

यह भजन बिंदु जी महाराज द्वारा लिखा हुआ है:

जो करुनाकर तुम्हारा ब्रज में फिर अवतार हो जाए
तो भक्ति का चमन उजड़ा हुआ गुलज़ार हो जाए 

गरीबों को उठा लो सांवले गर अपने हाथों से
तो इसमें शक नहीं दोनों का जीर्णोधार हो जाए

लुटा कर दिल जो बैठे है, वोह रो रो कर यह कहते हैं
किसी सूरत से सुन्दर श्याम का दीदार हो जाए

सुना दो रसमयी अनुराग की वोह बांसुरी अपनी
की जिसकी तान की तार तन में पैदा तार हो जाए

पड़ी भाव सिन्धु में है दीनो के दृगबिंदु की नैय्या
कंहैय्या तुम सहारा दो तो बेडा पार हो जाए

जो करूणा कर तुम्हारा ब्रज में फिर अवतार हो जाए
जो करूणाकर तुम्हारा ब्रज में फिर अवतार हो जाए
तो भक्ति का चमन उजड़ा हुआ गुलज़ार हो जाए

(नोट: इस भजन की पहली लाइन में करूणा कर को तोड़ दे तो अलग मतलब बन जाता है... इसीलिए मैंने जोड़ कर औत तोड़ कर लिखा है)

Apradhi and Radhika | Binduji and Vinod Agrawal ji

कैसे ठाकुर जी ने राधा जी की से जुडी सब चीजों का मान बढाया है. बिंदु जी महाराज द्वारा लिखा गया है, और विनोद अग्रवाल जी ने गाया है "सुर रखवारी"  (बांके बोलो तो सही ) में :

यह कीर्ति सुता हैं या की कीर्ति पसार वे को
किर्तिविहीन हु की कीर्ति बढ़ावे हैं

यह गोप की सुता है, या के गोप कुल मान राखी,
'बिंदु' ग्वाल बालन की झूठन हु खावे हैं

राधिका के शब्द में है, आदि शब्द राधी
या ते श्याम अपराधी, कंठ से लगावे हैं

राधा राधा राधा, राधा राधा राधा

Thursday, August 12, 2010

Jo Shyam par fida ho

This bhajan was written by Bindoo Goswami, a prominent personality in  Vrindavan.

जो श्याम पर फ़िदा हो, उस तन को ढूँढ़ते हैं
घर श्याम का हो जिसमें, वोह मन ढूंढते हैं

बंधता है जिस में, वोह ब्रह्म मुक्त बंधन
उस प्रेम के अनूठे बंधन को ढूंढते है
जो श्याम...

जो बीत जाए प्रीतम की याद में विरह में
जीवन भी देके ऐसे, जीवन को ढूंढते है
जो श्याम...

आहों की जो घटा हो, दामनी  हो दर्द-इ-दिल की
दृग बिंदु वर से बरसे, उस घन को ढूंढते है
जो श्याम पर....